मै हर बार सोचता हुँ कुछ और लिखूँ ...पर जब भी ये कलम उठती है ... तेरा नाम ही चला आता है ...
अब मैं तेरा दिवाना नहीं रहा ...
कमब्खत पर ना जाने क्यों मेरी हर बात तुझपे ही खत्म होती है ...
- 'SMV'
अब मैं तेरा दिवाना नहीं रहा ...
कमब्खत पर ना जाने क्यों मेरी हर बात तुझपे ही खत्म होती है ...
- 'SMV'
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